Google Tax क्या होता है? Google Tax कैसे काम करता है?

Google Tax क्या होता है? यह सवाल हर किसी के मन में आता है जब वह इस गूगल टैक्स के बारे में सुनता है। तो आज हम इसी गूगल टैक्स के बारे में बात करेंगे की गूगल टैक्स क्या होता है? और गूगल टैक्स कैसे काम करता है तो जुड़े रहिये इस आर्टिकल के साथ।

Google Tax Google Tax Google Tax आखिर क्या है यह गूगल टैक्स जिसने इस साल 2020 में बड़ी बड़ी अमेरिकन डिजिटल कंपनी को और यहाँ तक की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प तक को परेशान कर दिया है। तो इस आर्टिकल में आपको विस्तार से पता चलेगा की गूगल टैक्स क्या होता है? इसके साथ गूगल टैक्स कैसे काम करता है।

Google Tax क्या है?

Google Tax क्या होता है। इसे समझने से पहले आपको यह समझना होगा की Google Tax का नाम क्या है। इस टैक्स का नाम “Equalisation Levy” है जिसे भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2016-2017 में पेश किया था। और इसे 1 जून 2016 को लागू कर दिया गया था। अब क्योंकि यह टैक्स खासतौर से गूगल पर लगाया गया है तो इसका नाम पड़ गया “Google Tax” ऐसा नहीं है की बाकी कंपनी पर यह टैक्स नहीं लगाया गया है वास्तविक तौर से तो सभी डिजिटल कंपनी अब इस टैक्स के घेरे में आती है लेकिन इस टैक्स का सबसे ज्यादा असर गूगल पर पड़ा है।

अब इस गूगल टैक्स के बारे में बात कर लेते है की आखिर यह Google Tax क्या होता है? गूगल टैक्स भारत सरकार के द्वारा सभी डिजिटल कंपनी जैसे Amazon, Facebook और Google पर लगाया गया टैक्स है। अभी तक यह सभी डिजिटल कंपनी भारत में व्यापार करते हुए भी टैक्स नहीं दे रही थी या दूसरे शब्दों में कहूं तो ना के बराबर टैक्स दे रही थी मतलब की जितना टैक्स इन्हे देना चाहिए उतना नहीं दे रही थी लेकिन अब भारत सरकार ने इन सभी कंपनियों को आड़े हाथ लिया है।

Digital Company क्या होती है?

गूगल टैक्स के बारे में और गहराई से समझने के लिए आपको डिजिटल कंपनी के बारे में समझना होगा की आखिर यह डिजिटल कंपनी क्या होती है? डिजिटल कंपनी वह कंपनी होती है जो केवल इंटरनेट पर ही चलती जैसे Google, Facebook, Twitter वैगरह। यह कंपनी अपनी सर्विस केवल इंटरनेट पर ही देती है इनका ऑफलाइन मार्किट में कोई हाथ नहीं होता है।

इन कंपनियों की मुख्य आय का स्रोत ऑनलाइन विज्ञापन होते है जब आप फेसबुक चलाते है तो आपने अक्सर अपनी न्यूज़ फीड में किसी विज्ञापन को देखा होगा। इन्ही विज्ञापन से यह कंपनी मुनाफा कमाती है। अब अगर कोई विदेशी कंपनी भारत में आकर कोई ऑनलाइन सर्विस को बेच कर मुनाफा कर रही है तो टैक्स देना तो लाजमी है लेकिन यह कंपनी उतना टैक्स नहीं देती है जितना की इन्हे देना चाहिए। अब इसकी दो मुख्य वजह है।

पुरानी कर प्रणाली – सबसे पहली वजह है हमारा टैक्स सिस्टम जो की बहुत पुराना है अब जब भारत का टैक्स सिस्टम बनाया गया था तब थोड़ी किसी को पता था की आज जो हम टीवी पर विज्ञापन देख रहे है उसे हम एक दिन किसी टच स्क्रीन फ़ोन में देखेंगे।

भारतीय कर कानून – दूसरी बड़ी वजह है भारतीय कराधान कानून। भारत में कर कनून के अनुसार भारत सरकार केवल उन्ही कंपनियों से टैक्स ले सकती है जिनका भारत में स्थायी स्थापना हो। जबकि इन डिजिटल कंपनी की स्थायी स्थापना तो विदेश में है।

हाँ, मैं जानता हूँ, की आप यह सोच रहे होंगे की गूगल का इंडिया में तो बहुत आलिशान कांच का ऑफिस है लेकिन यह गूगल की सहायक कंपनी Google India Pvt. Ltd. है लेकिन इसकी parent कंपनी google तो अमेरिका में है। तो अगर कोई भारतीय व्यापारी गूगल पर अगर कोई विज्ञापन चलाता है तो वह Google India Pvt. Ltd. को नहीं बल्कि इसकी पैरेंट कंपनी google को payment करता है जो की भारत में नहीं है। तो ऐसे में गूगल टैक्स से बच निकलता है।

Google Tax क्या होता है

भारत सरकार गूगल से टैक्स तो लेती है लेकिन वह सिर्फ Google India Pvt. Ltd. से ही टैक्स लेती है जबकि विज्ञापन के द्वारा आया सारा पैसा गूगल के पास जाता है जो की अमेरिका में है तो इस तरह से गूगल अपनी सारी कमाई पर टैक्स नहीं भरता है।

बस इसी बात को मध्य नज़र में रखते हुए भारत सरकार 2016 के बजट में Equalisation Levy टैक्स को ले कर आई। यह एक direct tax है।

Google Tax कैसे काम करता है?

अब बात करते है की यह गूगल टैक्स काम कैसे करता है। इसे एक उदहारण के साथ समझते है तो ऐसे इसे समझने में आपको आसानी होगी।

मान लीजिये की राहुल को गूगल पर अपनी कंपनी या प्रोडक्ट के प्रमोशन के लिए विज्ञापन चलाना है और राहुल का विज्ञापन के लिए बजट है 1,00,000 रुपए। अब पहले तो यह होता था की राहुल गूगल पर जाकर सीधे 1,00,000 का गूगल को जो की मुख्य कंपनी है भुगतान कर देता था उसके बाद वह उस 1,00,000 रुपए से गूगल पर विज्ञापन चला सकता था।

लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब जब राहुल गूगल पर 1,00,000 रुपए का विज्ञापन चलना चाहता है तो उसे गूगल को 1,00,000 रुपए का भुगतान करने के साथ साथ 6% का टैक्स भी भरना होगा यानी उसे कुल भुगतान 1,06,000 रुपए का करना होगा। लेकिन घबराइए मत क्योंकि यह Equalisation Levy टैक्स राहुल की जेब से नहीं बल्कि गूगल की जेब से जाएगा।

यानी गूगल राहुल को 1,06,000 रुपए का बिल देगा और उसे 1,06,000 रुपए का ही विज्ञापन चलाने की अनुमति देगा। लेकिन यह राहुल की जिम्मेदारी है की अब वह उस 6000 रुपए टैक्स को सरकार को चुकाए। अगर राहुल सरकार को टैक्स नहीं चुकाता है तो फिर उसे भारी जुर्माना देना होगा।

एक बात और यह टैक्स राहुल को तभी देना होगा जब वह 1 लाख रुपए से अधिक का विज्ञापन चलाता है। अगर राहुल 1 लाख रुपए से काम का विज्ञापन चलाता है तो फिर वह टैक्स से बच जाएगा और अगर 1 लाख रुपए से अधिक का विज्ञापन चलाता है तो फिर उसे पूरा टैक्स भरना होगा। इस प्रकार यह बन गया एक डायरेक्ट टैक्स।

यह टैक्स की प्रक्रिया उन वेबसाइट के लिए है जो ऑनलाइन विज्ञापन दिखा कर पैसा कमाती है जैसे गूगल, फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि। लेकिन e-commerce वेबसाइट के लिए प्रक्रिया फर्क है यानी e-commerce वेबसाइट पर यही Equalisation Levy टैक्स सरकार इनडायरेक्ट टैक्स के रूप में वसूलेगी। क्योंकि यहाँ करोड़ो ग्राहक हर छोटी छोटी चीज़ के लिए डायरेक्ट टैक्स नहीं भर सकते है।

अब इस के लिए सरकार ने एक तरीका निकाला है। साल 2020 से B2B यानी Business to Customer के तहत अमेज़न जैसे e-commerce कंपनी को टैक्स के दायरे में लाया गया। जिसके तहत 1 अप्रैल 2020 से अमेज़न को हर वित्त वर्ष 2% टैक्स अपनी हर लेन देन पर देना होगा। हाँ, अगर कंपनी किसी वित्त वर्ष में 2 करोड़ से कम की कमाई करती है तो फिर उसे यह टैक्स नहीं देना होगा।

इस प्रकार यह बन गया इनडायरेक्ट टैक्स। क्यूंकि इसमें ग्राहक टैक्स देगा कंपनी को और कंपनी देगी सरकार को।इसके साथ सवाल यह उठता है की क्यों सरकार गूगल और फेसबुक जैसी वेबसाइट के लिए डायरेक्ट टैक्स और अमेज़न जैसे वेबसाइट के लिए इनडायरेक्ट टैक्स लेती है, तो इसका जवाब हम आपको पहले ही दे चुके है की भारत के टैक्स सिस्टम के अनुसार सरकार सिर्फ उन्ही कंपनी से टैक्स ले सकती है जिसकी भारत में स्थायी स्थापना हो। इसीलिए ऑनलाइन विज्ञापन दिखाने वाली वेबसाइट से सरकार डायरेक्ट टैक्स वसूलती है।

अब दूसरा सवाल यह उठता है की फिर अमेज़न के लिए इनडायरेक्ट टैक्स क्यो, उसकी भी तो भारत में स्थायी स्थापना नहीं है। वह इसीलिए क्योंकि सरकार ने 2008 के फाइनेंस बिल में एक शब्द जोड़ा था Significant Economic Presence, इसका मतलब होता है महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति। जिसके अनुसार सरकार किसी विदेशी कंपनी से इस आधार पर टैक्स लेगी की उसकी भारत में कितनी मौजूदगी है।

इस के अनुसार फेसबुक और गूगल एक ऑनलाइन विज्ञापन दिखाने वाली कंपनी है जबकि अमेज़न ऑनलाइन वेबसाइट के द्वारा कोई भी प्रोडक्ट बेचती है जिसके लिए अमेज़न के भारत में सेंकडो ब्रांच है और उसकी मौजूदगी किसी भी विदेशी कंपनी से ज्यादा है।

निष्कर्ष

मुझे उम्मीद है की आपको समझ आ गया होगा की गूगल टैक्स क्या होता है और गूगल टैक्स काम कैसे करता है। अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोसत के साथ शेयर करे ताकि वह भी इस टैक्स के बारे में समझ सके। अगर आपको अभी भी गूगल टैक्स के बारे में कुछ समझ न आ रहा हो या फिर आपका गूगल टैक्स से सम्बंधित कोई भी सवाल हो तो आप हमे निचे कमेंट करके पूछ सकते है।

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