No Cost EMI क्या होती है?

No Cost EMI क्या होती है? नो कॉस्ट ईएमआई से कैसे काम करती है? नो कॉस्ट ईएमआई के फायदे क्या होते है और नो कॉस्ट ईएमआई के नुक्सान क्या होते है? ऐसे सवालों के जवाब के लिए इस मजेदार और जानकारीपूर्ण लेख को पूरा पढ़े।

इस आर्टिकल में हम बात करेंगे कि नो कॉस्ट ईएमआई क्या होती है? नो कॉस्ट ईएमआई कि पूरी प्रक्रिया कैसे काम करती है? इसके साथ नो कॉस्ट ईएमआई के फायदे और नुक्सान क्या होते है और नो कॉस्ट ईएमआई में आपको किन किन चीज़ो का ध्यान रखना चाहिए।

No Cost EMI क्या होती है?

No Cost Emi एक ऐसी भुगतान की प्रक्रिया है जिसमें आप किसी भी प्रोडक्ट को खरीदने पर उसके कुल मूल्य को छोटी छोटी मासिक किश्त में बिना किसी भी ब्याज के चुका सकते है। इसमें आपको केवल प्रोडक्ट का मूल्य ही चुकाना होता है। इसमें किसी भी तरह का ब्याज, फाइल चार्ज, प्रोसेसिंग फीस या किसी भी तरह का कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता है।

उदाहरण के लिए:- मान लीजिए आप amazon या flipkart से कोई 15,000 का फ़ोन No Cost EMI में खरीदते है और उसकी 12 नो कॉस्ट ईएमआई बनवा लेते है तो इसमें आपको मात्र 1250 हर महीने देने होंगे। इसके अलावा बैंक आपसे किसी भी तरह का ब्याज या extra charge नहीं लेगा।

कुल मिलकर आपको 12 महीने में 15,000 रूपये ही देने होंगे। इसके अलावा आपको कोई भी अतरिक्त पैसा नहीं देना होगा। तो ये होती है No Cost EMI

No Cost EMI काम कैसे करती है?

इस दुनिया में कुछ भी चीज़ फ्री नहीं होती है कोई किसी कि बिना फायदे के मदद नहीं करता है जब तक कि उसे खुद फायदा न हो। अगर आप ऐसा सोचते है कि बैंक आपको नो कॉस्ट ईएमआई में कुछ भी खरीदने कि आजादी दे रहा है तो आप गलता सोचते है। बैंक एक रुपया भी तब तक किसी को नहीं देता है जब तक कि उसे उसका ब्याज न मिले या कोई और फायदा न हो।

तो नो कॉस्ट ईएमआई जैसे वास्तविकता में कोई चीज़ नहीं होती है बैंक तब भी ब्याज ले ही रहा होता है। हाँ, लेकिन इससे आपको कोई नुक्सान नहीं होता है इससे आपको फायदा ही होता है तो अब बात करते है कि नो कॉस्ट ईएमआई कि पूरी प्रक्रिया आखिर काम कैसे करती है।

मान लीजिये realme अपना कोई फ़ोन लॉन्च करने जा रही है अब कंपनी चाहती है कि उसके फ़ोन कि खूब बिक्री हो ऐसे कंपनी बैंक के साथ मिलकर एक सांठ गाँठ करती है और कंपनी बैंक को कहती है कि आप हमारे फ़ोन को नो कॉस्ट ईएमआई पर लोगो को फाइनेंस करे और इसके बदले हम आपको प्रति यूनिट 2000 रुपए देंगे जो कि वह उनका वास्तविक ब्याज होता ही है।

इसके बाद बैंक और कंपनी के बीच हुई इस डील के अनुसार कंपनी अपने प्रोडक्ट कि कीमत का निर्धारण करती है। आप सोचते है कि आप ब्याज नहीं भर रहे है जो कि ठीक भी है बैंक को पैसे कंपनी दे रही है लेकिन वह पैसे कंपनी उसी फ़ोन में ही जोड़ती है।

तो चाहे आप कान सीधे हाथ से पकड़ो या उलटे हाथ से पैसे आपके पास से ही जा रहे होते है नो कॉस्ट ईएमआई एक मार्केटिंग term है जिसे कंपनी अपनी सेल्स को बूस्ट करने के लिए करती है।

No Cost EMI के फायदे क्या है?

No Cost EMI से उपभोक्ता को बैंक को और मैन्युफैक्चरर को सभी को इससे फायदा होता है। आइये इसे उदहारण से समझते है।

मान लीजिए आप सैमसंग का एक फ़ोन खरीदना चाहते है जिसकी कीमत 30,000 रूपये है।

अब पहला ऑप्शन आपके पास यह है कि आप इसे अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर चेक करते है तो वहाँ पर यह आपको 25,000 रूपये का मिलता है अब आप एक बार में भुगतान (one-shot payment) के द्वारा आप इसे खरीद सकते है लेकिन इसमें आपको 25,000 रूपये एक बार में ही देने होंगे।

दूसरा ऑप्शन आपके पास यह है कि आप इसे no cost emi में ख़रीदे। यहाँ पर आपको यह फ़ोन 25,000 रूपये का ही मिल रहा है लेकिन यहाँ पर आप इसकी 12 no cost emi बनवा सकते है इसके साथ आपको इसमें 1000 रुपए का upfront discount भी मिल रहा है तो इसमें आपको हर महीने 2000 रुपए कि मासिक क़िस्त देनी होगी। और कुल रकम आपको 12 महीने में 24,000 देनी होगी।

तीसरा ऑप्शन आपके पास है कि आप ऑफलाइन स्टोर में जाकर सीधे retailer से ख़रीदे और उससे मोल भाव करे और हो सकता है कि आपको यही फ़ोन 24,000 से भी सस्ता मिल जाए। यह पूरी तरह से उस स्टोर पर निर्भर करता है हालांकि कंपनी रिटेलर को काफी मार्जिन देती है तो आप उससे मोल भाव कर सकते है।

No Cost EMI से उपभोक्ता को क्या फायदा होता है?

No cost EMI से उपभोक्ता को बहुत फायदा होता है क्योंकि नो कॉस्ट ईएमआई में उपभोक्ता को एक बार में ही सारा पैसा नहीं देना होता है वह अपनी सहूलियत के अनुसार जितनी चाहे उतनी छोटी किश्त बनवा सकता है और वह भी बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के।

नो कॉस्ट ईएमआई के द्वारा उपभोक्ता जितनी चाहे उतनी बड़ी और महंगी चीज़ खरीद सकता है एक और अच्छी बात यह है की नो कॉस्ट ईएमआई में कोई भी तत्काल या अग्रिम भुगतान (down payment) करने की जरुरत नहीं होती है। प्रोडक्ट खरीदने के बाद अगले महीने उसे पहली किश्त देनी होती है।

नो कॉस्ट ईएमआई से उपभोक्ता को एक और बड़ा फायदा है जो है कि जब आप पूरी ईएमआई को भर देते हो तो इससे आपका सिबिल स्कोर भी सुधरता रहता है जिससे भविष्य में आप बैंक से कोई लोन भी ले सकते है इससे बैंक का आप पर विश्वास बन जाता है।

No Cost EMI से बैंक को क्या फायदा होता है?

No Cost EMI में बैंक को भी फायदा होता है बैंक सामने से ब्याज न लेकर सीधे कंपनी से सौदा करता है और per piece पर अपनी कमीशन लेता है तो किसी भी प्रोडक्ट के जितने ज्यादा पीस बिकते है बैंक को उतना ही मुनाफा होता है।

No Cost EMI से मैन्युफैक्चरर को क्या फायदा होता है?

नो कॉस्ट ईएमआई से मैन्युफैक्चरर को भी बहुत बड़ा फायदा होता है। इस नो कॉस्ट ईएमआई के द्वारा मैन्युफैक्चरर के प्रोडक्ट कि बिक्री में इजाफा होता है जैसे अगर किसी कंपनी का कोई फ्लैगशिप फ़ोन है जो बहुत महंगा है जिसे ग्राहक एक बार में भुगतान से खरीद नहीं सकता है तो इस नो कॉस्ट ईएमआई के द्वारा उपभोक्ता के फ़ोन खरीदने कि सम्भावना बढ़ जाती है।

ऐसा देखा गया है कि जिस प्रोडक्ट पर नो कॉस्ट ईएमआई होती है उसकी अक्सर ज्यादा बिक्री होती है। इसीलिए अब हर कंपनी अपने प्रोडक्ट पर नो कॉस्ट ईएमआई देनी कि ही कोशिश करती है।

No Cost EMI के नुक्सान क्या है?

नो कॉस्ट ईएमआई से नुक्सान तो कुछ नहीं होते है लेकिन आपको नो कॉस्ट ईएमआई से कुछ भी खरीदने से पहले कुछ विशेष बात को ध्यान रखना चाहिए। जिनके बारे में हम निचे बात करेंगे।

No Cost EMI में किन किन बातो का ध्यान रखना चाहिए?

Old Model – अमेज़न या फ्लिपकार्ट पर ऐसे प्रोडक्ट नो कॉस्ट ईएमआई पर ज्यादा मिलते है जो पुराने मॉडल के होते है या फिर जिनकी बिक्री बहुत कम होती है तो ऐसे में पुराने स्टॉक को निकलने के लिए ऐसे प्रोडक्ट पर नो कॉस्ट ईएमआई होती है तो ऐसे प्रोडक्ट से आप बचे। क्योंकि इससे कंपनी को फायदा और आपको नुक्सान होता है।

Compare Price – नो कॉस्ट ईएमआई में किसी भी प्रोडक्ट को खरीदने से पहले उसके मूल्य को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मार्किट में जरूर पता करे और कई बार ऑनलाइन प्रोडक्ट पर नो कॉस्ट ईएमआई तो होती है लेकिन वह ऑफलाइन स्टोर कि तुलना में बहुत महंगे भी होते है तो नो कॉस्ट ईएमआई में कुछ भी खरीदने से पहले उसके मूल्य कि तुलना करे।

Term & Condition – नो कॉस्ट ईएमआई लेने से पहले उसकी नियम और शर्ते जरूर पढ़े। क्योंकि कई बार कंपनी नो कॉस्ट ईएमआई बोलती जरूर है लेकिन उसमें वह फाइल चार्ज, प्रोसेसिंग फीस या किसी तरह का एक्स्ट्रा चार्ज लगा देते है।

कई बार पहले 6 महीने तो नो कॉस्ट ईएमआई होती है उसके बाद अगले 6 महीने में वह ब्याज वसूलते है इसलिए नो कॉस्ट ईएमआई लेने से पहले अच्छी तरह से बैंक कि नियम व शर्ते पढ़े।

निष्कर्ष

मुझे उम्मीद है कि आप समझ गए होंगे कि No Cost EMI क्या होती है अगर फिर भी आपका कोई सवाल हो तो आप हमे निचे कमेंट करके पूछ सकते है। इसके अलावा अगर आपको हमारे द्वारा नो कॉस्ट ईएमआई पर दी गई जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करे।

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